नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल चौधरी सत्यपाल सिंह मलिक का मंगलवार को निधन हो गया है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
सत्यपाल मलिक के निधन की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके ही आधिकारिक अकाउंट से साझा की गई। एक्स पोस्ट में लिखा गया, "पूर्व गवर्नर चौधरी सत्यपाल सिंह मलिक नहीं रहे।"
पूर्व गवर्नर चौधरी सत्यपाल सिंह मलिक जी नहीं रहें।#satyapalmalik
— Satyapal Malik (@SatyapalMalik6) August 5, 2025
जानकारी के अनुसार, सत्यपाल मलिक पिछले कई महीनों से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। आरएलएम अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार को उनका निधन हो गया।
जाट नेता के तौर पर बनाई पहचान, कई पार्टियों से जुड़े
उत्तर प्रदेश के बागपत से जाट नेता के तौर पर उभरने वाले मलिक ने एक छात्र नेता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। 1974 में चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल से वे पहली बार विधायक चुने गए। उन्होंने राज्यसभा सांसद और बाद में अलीगढ़ से जनता दल के लोकसभा सांसद के रूप में भी कार्य किया। बाद के वर्षों में वे कांग्रेस, फिर लोकदल और फिर समाजवादी पार्टी में भी शामिल हुए।
मलिक को 2017 में बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें ओडिशा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। अगस्त 2018 में उन्हें तत्कालीन राज्य जम्मू और कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया गया। मलिक उस समय राज्यपाल थे जब केंद्र ने 2019 में जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया और अनुच्छेद 370 हटाते हुए इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया।
मलिक उस समय भी राज्यपाल थे जब 2019 के लोकसभा चुनाव से कुछ महीनों पहले पुलवामा आतंकवादी हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। जम्मू और कश्मीर के बाद, मलिक ने गोवा और मेघालय के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।
जम्मू-कश्मीर के अंतिम पूर्णकालिक राज्यपाल
चौधरी सत्यपाल सिंह मलिक मेघालय, गोवा, बिहार और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में राज्यपाल के पद पर रह चुके थे। मलिक ने जम्मू-कश्मीर के अंतिम पूर्णकालिक राज्यपाल के रूप में काम किया। वे अपने स्पष्टवादी और बेबाक बयानों के लिए भी खासे चर्चित रहे।
सत्यपाल मलिक के निधन की खबर फैलते ही कई प्रमुख नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।
हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने सत्यपाल मलिक के निधन पर दुख जताते हुए 'एक्स' पर लिखा, "पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ जननेता सत्यपाल मलिक के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। वे हमेशा जनहित की बात निर्भीकता से रखते रहे। जननायक जनता पार्टी उनकी बेबाक राजनीति, किसान हितैषी सोच और सार्वजनिक जीवन में सादगी को सादर नमन करती है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।"
नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़े आरोपों के बाद रहे चर्चा में
पिछले कुछ सालों में सत्यपाल मलिक खासे चर्चा में रहे। नरेंद्र मोदी सरकार पर उनके लगाए बड़े आरोपों ने उन्हें विपक्षी नेताओं के करीब ला दिया था। मलिक और भाजपा सरकार के बीच संबंध 2020-21 के आसपास तब बिगड़ने लगे जब जाट नेता ने अब रद्द हो चुके तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन किया।
हालांकि, उनके सबसे बड़े आरोप 2023 में एक इंटरव्यू के दौरान सामने आए, जब उन्होंने पुलवामा हमले के लिए जिम्मेदार चूकों और गलतियों की ओर इशारा किया और ये भी आरोप लगाया कि केंद्र ने उन्हें चुप रहने के लिए कहा था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सीआरपीएफ जवानों को विमान से भेजने के अनुरोध को ठुकरा दिया गया था। गौरतलब है कि पुलवामा में 2019 की 14 फरवरी को जवानों को तब निशाना बनाया गया जब वे सड़क मार्ग से यात्रा कर रहे थे।
केंद्र की इन दिनों में तीखी आलोचना ने मलिक को विपक्षी खेमे के करीब ला दिया था। यहां तक कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2023 में उनका इंटरव्यू लिया, जहाँ उन्होंने पुलवामा की घटना पर अपने आरोपों को फिर से दोहराया। राहुल गांधी ने मई में अस्पताल में सत्यपाल मलिक से मुलाकात भी की थी।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)