नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग (ECI) पर 'वोट चोरी' का गंभीर आरोप लगाने के बाद, आयोग ने शुक्रवार को एक कड़ा बयान जारी किया।आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को आधारहीन और गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए अपने अधिकारियों को ऐसे बयानों पर ध्यान न देने की सलाह दी है। साथ ही सभी चुनाव अधिकारियों से ऐसे बयानों की अनदेखी कर निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ काम करने का आह्वान किया।

संसद में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके पास चुनाव आयोग द्वारा बड़े पैमाने पर "वोट चोरी" का "खुला और स्पष्ट सबूत" है। उनका यह आरोप मुख्य रूप से बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास को लेकर है। 

राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों, फिर लोकसभा चुनावों और उसके बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में धांधली का संदेह हुआ था। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में अचानक एक करोड़ नए मतदाता जोड़े गए थे, जिससे उनका संदेह गहरा हो गया। इसके बाद, विपक्ष ने छह महीने की अपनी जांच शुरू की।

राहुल गांधी ने कहा कि इस जांच में जो सामने आया है, वह "परमाणु बम से कम नहीं है" और "जब यह फटेगा, तो चुनाव आयोग के पास छिपने की कोई जगह नहीं बचेगी।" उन्होंने ECI के अधिकारियों को भी चेतावनी दी, "जो भी इस काम में शामिल है, ऊपर से नीचे तक, हम उसे बख्शेंगे नहीं।"

राहुल ने ईसीआई के अधिकारियों के काम को "देश के खिलाफ" बताया और इसे "राजद्रोह" से कम नहीं कहा। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा, "आप जहां भी होंगे, हम आपको ढूंढ लेंगे, भले ही आप सेवानिवृत्त हो चुके हों।"

राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग का सख्त रुख

राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने एक तीखी प्रतिक्रिया दी। एक बयान में आयोग ने कहा, "चुनाव आयोग रोजाना लगाए जा रहे ऐसे आधारहीन आरोपों को नजरअंदाज करता है, और रोज दी जा रही धमकियों के बावजूद, सभी चुनाव अधिकारियों से ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों को नजरअंदाज करने और निष्पक्ष, पारदर्शी तरीके से काम करना जारी रखने का आग्रह करता है।"

चुनाव आयोग ने दोहराया कि उसका प्राथमिक ध्यान लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और पूरे देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने पर है।

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद जारी है। विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के सदस्य इस अभ्यास की निंदा करते हुए इसे "लोकतंत्र पर हमला" बता रहे हैं और इसे तुरंत रोकने की मांग कर रहे हैं। वे संसद के चल रहे मानसून सत्र में इस मुद्दे पर विशेष चर्चा की भी मांग कर रहे हैं। गुरुवार को हुई एक बैठक में 'इंडिया' गठबंधन के सदस्यों ने बिहार में इस अभ्यास के खिलाफ संसद के अंदर और बाहर, दोनों जगह अपने विरोध प्रदर्शनों को और तेज करने का फैसला किया है।