अलिहान्द्रो होदरोव्स्की की फिल्मों ने विश्व-सिनेमा में एक अलग ही वर्चस्व कायम कर रखा है। इस चिलियन निर्देशक को फिल्मों की दुनिया में एक विजनरी निर्देशक की संज्ञा दी जाती है और इनकी फिल्मों को देखने के बाद यह एहसास और दृढ हो जाता है। विजनरी डायरेक्टर तो किसी न किसी दृष्टि से सभी ही होते हैं लेकिन इनकी फिल्मों में दुनिया को बदलने की एक अलग ही सिनोप्सिस है। एक विशुद्ध वैश्विक बंधुत्व भाव दृष्टि से ओत-प्रोत सिनेमाई दुनिया में एक जादू रचने का भाव रचने में इनकी फ़िल्में प्रयासरत हैं। करीब नब्बे वर्ष से ऊपर अलिहान्द्रो होदरोव्स्की आज भी सक्रिय हैं। और सोशल दुनिया में काफी सक्रियता से काम रहे हैं। उनकी आँखों की चमक और बच्चों-सी चंचलता अब भी मन को बांधती है और जीवन के प्रति उत्कट लालसा को रेखांकित करती है।
मेरे निर्देशकों की सूची काफी लम्बी है और देर से इनको देखने का अवसर हुआ। देर से मतलब कुछ वर्षों के बाद जब इन्हें देख लेना चाहिए था। मुझे लगा कि यह अच्छा ही हुआ क्योंकि इन्हें समझने के लिए एक ऐसी उमर की आवश्यकता है जिसमें लगे कि अपनी ओर से दुनिया को बदलने-देखने और समझने के काफी जतन कर लिए गएँ हैं। अब भी कई दृश्यों और बिम्बों को मैं देखने-समझने की लगातार कोशिश में हूँ और यह जानना चाहता हूँ कि अमुक दृश्य आखिर उनके जीवन के किस भाव बोध से प्रेरित होकर उपजे या निर्मित हुए हैं।
आखिर में हमेशा मैं यह पाता हूँ कि अलिहान्द्रो होदरोव्स्की का जीवन आखिरकार उनकी फिल्मों का ही प्रतिबिम्ब है। मूलतः यूक्रेन और रसिया से निर्वासित वे आखिर में चिली में बसे। इनके जीवन पर समकालीन राजनीति और देश की क्रूर नीतियों का गहरा प्रभाव तो पड़ा ही साथ ही इनका कोमल बचपन भी परिवार की टूटन, पीड़ा और उपेक्षा से जर्जर हुआ मिलता है।दरअसल दूसरे शब्दों में यह बात भी कहनी चाहिए कि इनकी सारी फिल्मों में लगभग अस्सी प्रतिशत हिस्सा बचपन का है, जो यूँ ही नहीं है। और उस हिस्से में आते हैं उनकी बेबसी, उपेक्षा, हिंसा, संघर्ष और प्रतिकार। किसी दुःस्वप्न की तरह उनकी फिल्मों में यह चीज हर जगह पसरी हुई है।
अलिहान्द्रो होदरोव्स्की की फिल्म El Toppo
सबसे पहले जिस फिल्म से उनको मकबूलियत हासिल हुई, वह है El Toppo। यह फिल्म दर्शन पर आधारित है। इसे देखते हुए ऐसी अनेक कहानियां बिखरी हुई याद आने लगती हैं जो गहन रूप से दर्शन, जीवन और यथार्थ से जुडी हुई हैं। इसमें केवल पश्चिमी दर्शन की ही नहीं ,बल्कि भारतीयता और मिथक की भी झलक मिलती है। ऐसा लगता है कि चेतन-अवचेतन का कोलाज हम देख रहे हों।
इस फिल्म में एक ऐसे विजेता की यात्रा के बारे में कहा गया है जो सर्वकालिक रूप से योद्धा के रूप में जगत को विजित करने निकला है। इसमें इस बात को दर्शाया गया है कि विजेता बनने की अनेक शर्तें होती हैं। शुद्ध रूप से नैतिक होकर आज तक न कोई विजेता बना है न ही बनेगा। इस फिल्म में रह-रह कर महाभारत जैसे विराट फलक भी याद आते रहते हैं।
यह फिल्म कई कारणों से चर्चा में रही आई। इस फिल्म के वास्तविक रेप सीन के बयान को लेकर भी काफी चर्चाएँ रहीं। इस फिल्म में नायक का किरदार स्वयं अलिहान्द्रो होदरोव्स्की ने निभाया है। आखिरकार नायक यह पाता है कि जिस जीत के झन्डे को लेकर वह हर जगह फहराना चाहता है वह नैतिकता और काफी हद तक अनैतिकता दोनों से मिलकर बना है।
The Holy Moutain भी है खास
अलिहान्द्रो होदरोव्स्की ने अपनी थीम और उसके ट्रीटमेंट को लेकर हमेशा चौंकाया है। किसी भी घटना को वे बेहद अलग तरीके से बरतते है। शायद जिसे अजीब कहा जाए। या इसे कुछ और ही कोई नाम दिया जाये। कुछ दृश्य तो ऐसे हैं जो सामान्य दर्शकों को सहज नहीं लगेंगे। लेकिन वे हैं और उसकी तह तक जाया जाए तो अपनी पूरी वजूद के साथ व्याख्या लिए हैं। उनकी एक और फिल्म The Holy Moutain का नाम भी लिया जा सकता है।
इसमें अध्यात्म जैसी किसी पवित्र चीज की खोज है और अमरता के बारे में विचार रखे गये हैं।दरअसल यह फिल्म मुझे कम पसंद है पर समीक्षकों की नजर में यह बेहद महत्वपूर्ण फिल्म है। इस फिल्म में उन्होंने सात अलग-अलग चरित्रों को जो एकदम विरोधाभासी हैं लेकर अमरता आदि के बारे खोज की है।अमरता आदि की बात मेरे लिए महत्वपूर्ण नही है।
असली बात है उन सातों के वर्तमान अस्तित्व से लेकर स्वयं तक की यात्रा का वृतांत। वे सातों अलग-अलग घृणा, जुगुप्सा, काम, क्रोध आदि भाव के चालक की तरह हैं। बाकी उनके आस-पास का जो यथार्थ उन्होंने पेश किया है वह नजर काबिलेतारीफ है।
रंग और नग्नता का प्रयोग
अलिहान्द्रो होदरोव्स्की ने जिस तरह से कला और रंगों को साधा है वह अप्रतिम है। रंगों का यूँ चटक प्रयोग करते हैं कि ऐसा लगता है मानों कोई लिथड़ा हुआ कैनवास है। ऐसा दूर से देखने पर लगता है, पर जैसे ही फिल्म में घुसते हैं वह चीज अचानक गायब होने लगती है। यह चीज उनके यहाँ एक जादू की तरह काम करती है। उसी तरह वे नग्नता का प्रयोग करते हैं। ऐसी उनकी कोई फिल्म नही हैं जिसमे आदमी अपने आदिम रूप में न हो लेकिन कुछेक मिनट के बाद ही उनकी नग्नता जैसे सहज और स्वाभाविक लगने लगती है। यह सम्मोहन की कला होगी। यह कहानी की भी धारिता होगी।
अलिहान्द्रो होदरोव्स्की की जिस फिल्म को मैं सबसे अच्छी फिल्म मानता हूँ , वह है –The Rainbow Thief। यह फिल्म पूंजी और साम्राज्यवाद के जिस घिनौने रूप को बयान करती है वहीं दोस्ती के पाक रिश्ते को भी बयां करती है। अलिहान्द्रो होदरोव्स्की की फिल्मों में गरीब मुख्य केंद्र के रूप में आते है और आता है उसके बरक्स क्रूर घृणास्पद तानाशाह या उससे ही जुड़ा कोई चेहरा। लेकिन हरेक बार जैसे मानवीयता ही उठ कर सतह तक आती है और घृणा तथा पूंजी का साम्राज्य टूटता है।
केवल गरीब ही नहीं, इनकी फिल्मों में बौने लोग, शारीरिक रूप से अक्षम लोग, गंदे भिखारी, शराबी, पागल, अर्द्धपागल आदि नायकत्व की भूमिका लिए आते हैं। यहाँ तक कि ये एक फिल्म में एक सामान्य कद काठी की हिरोइन के रूप में एक बौनी नायिका को दिखाते हैं। समता को जो व्यापक समाजशास्त्र अलिहान्द्रो होदरोव्स्की ने रचा है, वह आजतक किसी ने नहीं रचा होगा या स्वप्न में भी नही सोचा होगा।
समता के मामले में वे कभी समझौता नही करते हैं, वे ईश्वर को भी एक चरित्र के रूप में चुनते हैं तथा उसे भी समानता के भाव में ढाल देते हैं। वे उसे भी मरता हुआ दिखाते हैं। होता यह है कि वे एक प्रचलित कथा के बरक्स उसी की प्रतिकथा कहते हैं। उतनी ही वजनी उतनी ही महत्त्वपूर्ण।
बच्चे और अलिहान्द्रो होदरोव्स्की की फिल्में
यह शायद ही कभी हुआ हो कि Zodorvsky की फिल्म हो और उसमे बच्चा न आया हो। मुझे लगता है कि कभी-कभी इनकी फिल्मे बड़ी ही मासूम है। ये इसलिए भी होता है कि उन्होंने बच्चे की ही नजर से फ़िल्में बनाई हो और इतनी हैरतअंगेज चीजें उनकी ही नजर से दिख सकती है और अपने जीवन काल में हुए अनेक दुर्व्यवहार का बदला लिया हो। इनकी फिल्मों के बच्चे आसान किस्म के बच्चे नही हैं। वे हैं- दुखी बच्चे। पीड़ा और संत्रास में डूबे हुए बच्चे। इनकी ऑटोबायोग्राफी फिल्मों के अतिरिक्त भी शुरूआती फिल्मों के केंद्र में भी बच्चे पीड़ा में डूबे हुए हैं।
मनोविज्ञान की दृष्टि से भी और खासकर एक माता-पिता होने की वजह से भी इनकी फिल्मों का अध्ययन आवश्यक होने लगता है। शुरूआती फिल्म Santa Sangre ऐसी ही एक फिल्म है। इस फिल्म को देखकर बचपन की पीड़ा से रूबरू हुआ जा सकता है।
मनोविज्ञान की अध्ययन दृष्टि से भी यह फिल्म सर्वोत्तम फिल्म है। दो फ़िल्में हैं जिसमे निर्देशक की बचपन से ताल्लुक है –एक तो यह है और दूसरी है The Dance Of Reality। यह फिल्म कई दृष्टि से इनकी सर्वोत्तम फिल्म है। यह फिल्म स्वघोषित रूप से इनकी बचपन की भी कथा है। लेकिन santa sangre फिल्म में तो जैसे जीवन में कितना संत्रास है, कितनी पीड़ा है, कितनी क्रूर स्मृति है, कितने तनाव हैं। इन सारी चीजों को बड़ी गहराई से रेखांकित किया गया है। और साथ ही साथ माँ के रिश्ते पर बनाई गयीं ऐसी फ़िल्में कम होगी। और पिता की क्रूरता का रिश्ता भी, जो आगे चलकर अंतिम दो फिल्मों में विस्तार से दिखाई गयीं हैं, मेरा मानना यह है कि यह फिल्म इनकी अंतिम मास्टरपीस फिल्मों की तुलना में जौ भर भी कम नहीं हैं।
कहा जाता है कि Zodorvsky का जन्म माँ के बलात्कार से हुआ था, जो किसी और ने नहीं बल्कि इनके पिता ने ही किया था। वह भी तब जब अपनी दुकान पर इनके पिता एक महिला ग्राहक के साथ व्यस्त थे तभी इनकी माँ ने रंगे हाथों पकड़ लिया। पकड़े जाने के क्रोध के एवज में इनका जन्म हुआ। लगातार इनकी माँ इनके पिता से नफरत करती रहीं। और चूँकि उस बलात्कार के बाद इनका जन्म हुआ तो वो इनसे भी घृणा करती रहीं। इस तरह अलिहान्द्रो होदरोव्स्की लगातार घर में उपेक्षा के शिकार रहें।
इन बातों से वे भागे नहीं, बल्कि आगे चलकर इन्हे़ हू-ब-हू फिल्मों में भी दर्ज़ करने से नहीं चूकें। जैसे Santa Sangre का वह दृश्य जिसमे बच्चे का पिता सर्कस में किसी दूसरे महिला के साथ अवैध सम्बन्ध बनाता पकड़ा जाता है फिर वह खुद के पत्नी का बलात्कार करते हुए दिखाया जाता है।
एक फिल्म के बारे में सोचते हुए अक्सर मै जुगुप्सा से भर उठता था वह है –Dance of Reality। इसमें कोढ़ से तड़पता हुआ इनका पिता, जो वर्षों बाद, दूर देश से अचानक घर में आया है, और दर्द और दुःख-तकलीफ से दुहरा पड़ा हुआ है तथा इनकी माँ उसकी देह के साथ जो करती है वह कहीं-न-कहीं पुत्र की दबी हुई पीड़ा तो नही है।
इस बात को जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी और इसका जवाब खोजना पड़ेगा। मुझे इसका जवाब निर्देशक का अँधेरे में डूबा हुआ बचपन ही लगता है। एक ऐसा बचपन जब वे आत्महत्या की ओर झुक जाते हैं।
Endless Poetry- अंतिम फिल्म
इनकी अंतिम फिल्म है-Endless Poetry। समीक्षकों ने इसे सराहा है। यह अधिक देखी भी गयी है पर मेरे लिए यह कम महत्त्वपूर्ण है। यह निर्देशक के युवाजीवन के बारे में,कविता की ओर झुकाव, स्वप्न, प्रेम ,भटकाव, संघर्ष,और जीवन के बारे है। यह फिल्म भी देखी जानी चाहिए लेकिन सबसे पहले किसी निर्देशक को समझना है तो शुरू से ही देखना बेहतर होता है ताकि उसकी क्रमिक यात्रा के बारे में समझ ठोस रूप से विकसित हो सके।
अलिहान्द्रो होदरोव्स्की के बारे में यह साधारण किस्म के विचार हैं, क्योंकि कम से कम में भी किया जाए तो वे एक शोध का विषय हैं। अलिहान्द्रो होदरोव्स्की का जीवन गजब का जीवन रहा होगा, यह उनकी फिल्मों से प्रदर्शित होता है। ध्यान से देखें यह उनके चेहरे से भी प्रदर्शित होता है। उनके चेहरे पर वे सभी भाव दिखते हैं जो उनकी फिल्मों में दिखते हैं। बस शर्त यह है कि उनके चेहरे के अध्ययन से पहले उनकी फिल्मों का अध्ययन कर लिया जाए।